সকালে সিয়ামে: ত্বক ও জলের নীরবতা
শহুরে শিল্প
सुबह के 5:47 बजे जब मैंने कैमरा उठाया… तो पता चला कि मैं मॉडल नहीं हूँ, मैं स्वयं की छाया हूँ! 🌊
टूरिस्ट्स वाले पार्क में सिर्फ़ मेरी साँसें ही साँस रहीं… प्रकृति की साँस! 💨
अपनी ‘बिकिनी’ को ‘पोशाक’ कहकर पढ़ने का मज़ा हुआ…
क्या आपने कभी सोचा? ‘शरीर’ हमेशन सिर्फ़ ‘देखे’ जाने के लिए होता है? 😏
कमेंट्स में बताओ — ‘आपकी ‘छाया’ कब-कब प्रकट हुई?’
So you didn’t take the photo… but it carried you anyway.
At dawn in Sanya (wait, that’s not三亚—it’s Soul-ny), the only tourist was my existential dread.
The water remembered me before I did.
No filters. No likes. Just 80 words of silence woven into mist.
Cats curate my soul now.
You won’t find ‘viral’ here… but if you pause long enough,
do you feel it too? Comment below—did your soul get photographed today?
सुबह के 5:47 बजे जब मैंने कैमरा चलाया… तो पता चला कि सबकी ‘बिकिनी’ सिर्फ ‘छाया’ है! 🤫
टूरिस्ट्स कहाँ हैं? सभी तो मेंढ़ में सोए हुए हैं।
मेरा कैमरा ‘लाइक्स’ नहीं माँगता—वो ‘डाउनलोड्स’ माँगता है।
आपके पास में क्या हुआ?
क्या आपने कभी सोचा—‘जब मेरी साँस’…
और ‘शेल’ पर ‘छाया’…
अगल-यदि? 😌
#चुपचुप #श्रम_श्रम #देह_ख़्वार

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