रोशी नेहा की छाया
The Stillness Between Frames: A Visual Poet’s Reflection on Youth, Light, and the Body as Canvas
अरे भाई… ये तो सिर्फ़ एक फोटो है? नहीं! ये तो किसी की सांस का पत्थर है — 7:00 AM का कॉफ़ी पढ़ते-पढ़ते सुन्न हो गया, पर महिला का सिल्हूटेल… पूरी दुनिया में कोई नहीं देखता। AI के पास ‘perfect pose’ है? हमारे पास ‘जब’ है।
कल्पना में ‘body’ cataloged? हम सबके ‘skin-deep’ में ‘breath’ search करते हैं।
एक मॉडल 6 hour after… ‘I feel like my body doesn’t belong to me anymore’ — मतलब?
अब सच्चाई?
‘The Stillness Between Frames’ — जब 😌
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#NoFilters #JustBreath #VisualPoet
자기 소개
"मैं दिल्ली की एक फोटोग्राफर हूँ, जिस्मे में प्रत्येक पड़ाव सुनहरी यादों का संग्रह है। मेरी कैमरा सिर्फ़ तस्वीरें नहीं, बल्कि मौन के साँस हैं। मैं उन सभी पलकों को पकड़ती हूँ, जिन्हें में कोई सच्चाई छुपी हुई है। जब मैं 'छाया' (शाड) पकड़ती हूँ, मुझे 'मुख' (चेहरा) महसूस होता है। आपके सफर के साथ, अभिमान - दया - और प्रकाश... मिलते हैं।"

